Sailja
Inventore veritatis et quasi.

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

कहानियाँ

अन्तिम इच्छा

सत्तर की आयु पार करते ही देवधर के शरीर ने साथ देना छोड़ दिया। दमे की शिकायत तो उन्हें काफ़ी समय पहले से थी। सर्दी के दिनों में जब उनकी साँस उखड़ जाती तो खाँसते-खाँसते वह बेदम हो जाते। कई-कई आगे पढ़ें


खोई हुई पहचान

मुझे घर जाने की ज़रूरत है, इससे पहले कि मैं भूल जाऊँ कि मैं कौन हूँ, कहाँ से आई हूँ, और जाना कहाँ है? वे भी न जाने कहाँ खो गए, जो मेरी पहचान का कारण थे। मेरा मतलब मेरे आगे पढ़ें


प्रेरणा

मैं छत से नीचे आया और पूछा, "माँ सामान पैक हो गया है?" माँ ने कहा, “विनय बेटा सब रख दिया है। तुम्हारे कपड़े, रोज़मर्रा की चीज़ें, घी अचार। " मैं बोला, "अरे माँ तुम ने घी, अचार यह सब आगे पढ़ें


बहादुर

रेलवे स्टेशन की फुटपाथ पर बैठकर भीख माँगते हुए बहादुर को एक अरसा हो गया। जब पहली बार यहाँ आया फिर कभी अपने घर नहीं लौटा। इसका कारण -  वह दोनों पाँवों से विकलांग तो था ही साथ ही अब आगे पढ़ें


सफ़ेद दाग़

इला बड़ी देर से बस के आने का इन्तज़ार कर रही थी। काफ़ी लम्बे इन्तज़ार के बाद जब बस आई, तो इला भीड़ के साथ बस में चढ़ तो गई, लेकिन बैठने के लिए उसे सीट नहीं मिली। उसने भीड़ आगे पढ़ें


ज़िन्दगी

"ज़िन्दगी का चक्र पूर्णिमा के चाँद की तरह पूर्ण आकार में चलकर चमकता रहता है, और धीरे-धीरे समय के साथ अमावस्या की काली रात में तब्दील हो जाता है। यही सत्य है ज़िन्दगी का, ज़िन्दगी के चक्र का। इसी का आगे पढ़ें


हास्य/व्यंग्य

अन्य क्षेत्रों के खिलाड़ियों के गोल्ड मेडल

कामताप्रसाद जी आज ज़बरदस्त ख़ुश दिखायी दे रहे थे, जैसे वे देश के महान खिलाड़ी हों तथा देश के लिये एक-दो स्वर्ण पदक कामॅनवेल्थ खेलों में जीत कर अपने गृह नगर पहली बार आ रहे हों। वैसे इसमें कोई शक़ आगे पढ़ें


निन्दा-स्तुति का मज़ा, भगवतभक्ति में कहाँ

जीवन का जो मज़ा निन्दा-स्तुति में है, वैसा भगवत भक्ति में कहाँ? निन्दा-स्तुति वह नौका है जो  अठखेलियाँ करती हुई, रसवर्षा से सराबोर करती हुई, मनोरंजक हिचकोले खाती हुई, किसी भी उद्यमी व्यक्ति की ज़िंदगी की नदी को ख़ुशी-ख़ुशी पार आगे पढ़ें


पशु-आदमी भाई! भाई!

 वे आदमियों के डॉक्टर होना चाहते थे पर पेपर लीक कराने वाले ने उनका पूरा साथ नहीं दिया, सो चाहकर भी आदमियों के डॉक्टर न हो पाए तो सोचा- चलो, पशुओं के ही डॉक्टर हो जाएँ। वैसे भी आज की आगे पढ़ें


सोशल मीडिया के रास्ते प्रसिद्धि के वैकल्पिक सोपान

हर इंसान जीवन में प्रसिद्ध होना चाहता, नाम कमाना चाहता है। नेता लोग भले ही "आम आदमी" की टोपी पहने हुए लोगों को टोपी पहनाए लेकिन आम आदमी हमेशा से आम ना रहकर, ख़ास बनना और दिखना चाहता है और आगे पढ़ें


समीक्षा

छाया दी लेखक की चेतना है

पुस्तक: मुंतज़िर की आत्मकथा: ’छाया दी’ लेखक: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह पहला संस्करण: जनवरी-2016 मूल्य: 350/- प्रकाशक: मुक्तधारा प्रेस एण्ड पब्लिकेशन्स ’अमरावती’ अपर रोड, गुरुंगनगर, पो. प्रधान नगर, सिलीगुड़ी-०३, ज़िला दार्जिलिंग (प.बं)   प्रसिद्ध इतिहासज्ञ और जीवनी-लेखक टामस कारलाइल ने आगे पढ़ें


सुनो तो सही

समीक्षित कृति : सुनो तो सही कवयित्री : डॉ. पूर्णिमा शर्मा संस्करण : प्रथम (2017) प्रकाशन : किंडल (अमेजन) मूल्य : 100 रुपए पृष्ठ : 33  ज्ञानतत्व और स्नेहभरित मन की संयुक्त अभिव्यक्ति डॉ. पूर्णिमा शर्मा (1965) प्रतिष्ठित समीक्षक, लेखिका आगे पढ़ें


‘हिन्दी दलित आत्मकथाएँ : एक मूल्यांकन’ दलित साहित्य का प्रामाणिक दस्तावेज़

पुस्तक - हिन्दी दलित आत्मकथाएँ : एक मूल्यांकन  (2018,प्रथम संस्करण) लेखक - पुनीता जैन, प्रकाषक -सामायिक प्रकाशन, नई दिल्ली। मूल्य - 300/- रुपये  डॉ. पुनीता जैन की सद्यः प्रकाशित पुस्तक- ‘हिन्दी दलित आत्मकथाएँ - एक मूल्यांकन’ में हिन्दी दलित साहित्य आगे पढ़ें


समाचार

साहित्य जगत - कैनेडा

हिम की चादर पे खेले बसंत राज

हिम की चादर पे खेले बसंत राज

22 Feb, 2019

फरवरी 09, 2019 - कैनेडा की जानी-मानी और बहुआयामी संस्था हिंदी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी ०९ फ़रवरी २०१९ को…

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साहित्य जगत - भारत

स्पंदन संस्था भोपाल के सम्मानों की घोषणा

स्पंदन संस्था भोपाल के सम्मानों की घोषणा

26 Feb, 2019

श्री उदयन बाजपेई, श्री पंकज सुबीर, श्री आलोक चटर्जी, श्री महेश दर्पण तथा श्री प्रेम जनमेजय को स्पंदन सम्मान प्रदान…

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साहित्य जगत - विदेश

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा कथा-कविता सम्मान घोषित

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा कथा-कविता सम्मान घोषित

26 Feb, 2019

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अमेरिका ने अपने प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन ने अपने कथा-कविता सम्मान घोषित कर दिए…

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