23 May 2019
डॉ. सुरंगमा यादव के आलेख संग्रह ’विचार प्रवाह’ का विमोचन

डॉ. सुरंगमा यादव के आलेख संग्रह ’विचार प्रवाह’ का विमोचन

महामाया राजकीय महाविद्यालय, महोना, लखनऊ में दिनांक 9 व 10 फरवरी 2019 को आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में डॉ. सुरंगमा यादव, असि प्रो. हिन्दी की पुस्तक ’विचार प्रवाह’ का लोकार्पण मुख्य अतिथि डॉ. राजीव कुमार पाण्डेय, क्षे़त्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, लखनऊ(उ.प्र.) के कर कमलों द्वारा किया गया। इस पुस्तक में संकलित उच्च स्तरीय लेखों की विद्वत समाज द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की गयी।

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23 May 2019
अमेरिका की फ़ोलसम नगरी ने मनाया हिंदी कवि का जन्मोत्सव

अमेरिका की फ़ोलसम नगरी ने मनाया हिंदी कवि का जन्मोत्सव

बायें - काव्य पाठ करते अभिनव शुक्ल दायें - सरस्वती वंदना करती दीप्ति शरण 

 

मई १८, २०१९, फ़ोलसम, कैलिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका। कैलिफोर्निया की राजधानी साक्रामेंटो क्षेत्र की फॉल्सम नगरी के मेसॉनिक सेंटर सभागार में, लोकप्रिय हिंदी कवि अभिनव शुक्ल के चालीसवें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में एक हिंदी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अभिनव शुक्ल को सैक्रामेंटो के साहित्यिक समाज की ओर से सम्मानित किया गया तथा कवियों ने चार घंटों तक श्रोताओं को अपनी कविताओं के रस से सराबोर किया।

मंच पर अभिनव की विभिन्न भाव भंगिमाएँ प्रदर्शित करता एक बैनर लगाया गया था, अभिनव के जीवन के विविध पड़ावों को दर्शाते चित्र एक प्रोजेक्टर पर प्रदर्शित करने हेतु फिल्म तैयार की गयी थी तथा पूरा सभागार सुरुचिपूर्ण तरीके से सजाया गया था। कवि सम्मेलन के प्रारम्भ में जय श्रीवास्तव ने अभिनव को जन्मदिन की बधाइयाँ देते हुए इस कार्यक्रम के विषय में बताया, उन्होंने यह भी बताया कि अभिनव को कवि सम्मेलन के उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में होने की जानकारी नहीं थी तथा यह सभी की ओर से अपने कवि को एक सर-प्राइज़ है। उन्होंने श्रोताओं का स्वागत किया तथा मंच की बागडोर संचालन हेतु कवि अभिनव शुक्ल के  हाथों में सौंप दी। अभिनव ने प्रथम सत्र के कवियों, मनीष श्रीवास्तव, चिंतन राज्यगुरु, जय श्रीवास्तव, अनिरुद्ध पांडेय तथा अतुल श्रीवास्तव को अपनी काव्य पंक्तियाँ समर्पित करते हुए मंच पर आमंत्रित किया। तदुपरांत दीप्ति शरण ने अपने सुमधुर स्वरों से सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कवि सम्मलेन को गरिमा प्रदान करी। प्रथम सत्र के अंत में मनीष श्रीवास्तव ने कवि अभिनव शुक्ल का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने अभिनव की पुस्तकों, एलबमों आदि के बारे में बताते हुए कहा कि संसार की सौ से अधिक संस्थाएं अभिनव का सम्मान कर चुकी हैं तथा अभिनव अनेक पत्रिकाओं के संपादन में सहयोग कर चुके हैं। अभिनव की सुमधुर घनाक्षरियों के संग उनके चुटीले व्यंग्यों पर बोलते हुए मनीष ने अभिनव के नियमित स्तम्भकार होने की बात भी श्रोताओं को बताई। अभिनव के वायरल हुए वीडियोज़ की चर्चा करते हुए उन्होंने अभिनव को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं तथा मुख्य काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया। भावविभोर होते हुए अभिनव ने कहा कि हमारी संस्कृति में सृजन के प्रति सम्मान का भाव होने के चलते ही इस कार्यक्रम की उत्पत्ति हुई लगती है क्योंकि वे स्वयं को इस सम्मान हेतु योग्य पात्र नहीं समझते हैं। अभिनव ने इस आयोजन के लिए सभी आयोजकों को धन्यवाद देते हुए अपनी हास्य कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में अर्चना पांडा, शोनाली श्रीवास्तव तथा शिवेश सिन्हा ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।

अधिकांश कवियों ने सामाजिक विसंगतियों पर चुटीले प्रहार किए। चिंतन ने भारत में ट्रैफिक की स्थिति को भ्रष्टाचार से जोड़ती हुई कविता पढ़ी तो शिवेश ने अस्सी के दशक में टीवी एंटीने को सही दिशा में रखने वाले छोटे भाई का दायित्व निभाने पर एक कविता सुनाई। अर्चना पांडा ने बच्चियों पर होने वाले अत्याचारों पर कविता सुनाई तथा अनिरुद्ध पांडेय ने भारतीय वायुसेना के कैप्टन अभिमन्यु पर कविता सुनाई जिन्हें बहुत पसंद किया गया। जय श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया पर चुटकियां लीं तथा अतुल श्रीवास्तव ने संसार के पार को संसार से जोड़ती रचना सुनाई। मनीष और शोनाली ने होली के गीत पर एक मन-मोहक जुगलबंदी प्रस्तुत करी तथा अभिनव ने कार्यक्रम के सभी प्रायोजकों को धन्यवाद दिया तथा अपनी प्रसिद्ध रचना "पत्नी चालीसा" का पाठ किया जिसे श्रोताओं का भरपूर प्यार मिला।

कार्यक्रम से होने वाला सारा लाभ उड़ीसा में आए फ़ानी तूफ़ान से प्रभावित लोगों की रहतार्थ सेवा यूएसए द्वारा भेजा जा रहा है। जय श्रीवास्तव, शिवेश सिन्हा, ब्रह्म प्रकाश मोहंती, दिव्या, नम्रता, दीप्ति, स्मिता, परेश सिन्हा, प्रदीप मिश्रा, संतोष मिश्रा, सुनील कुमार, आशुतोष, प्रेम समेत अनेक साहित्य प्रेमियों ने इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग किया। कार्यक्रम के अंत में केक काटा गया तथा रात्रिभोज हुआ। अनेक भाषाओं में जन्मदिवस गीत गाते हुए, एक अमेरिकी नगरी ने अपने हिंदी कवि को जन्मदिन का अनमोल उपहार प्रदान किया।

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10 May 2019
ओमप्रकाश क्षत्रिय शब्द-निष्ठा सम्मान हेतु चयनित

ओमप्रकाश क्षत्रिय शब्द-निष्ठा सम्मान हेतु चयनित

 

रतनगढ़ - आचार्य रत्नलाल विज्ञानुग की स्मृति में शब्दनिष्ठा सम्मान देशभर की प्रसिद्ध साहित्यिक प्रतिभा और उन की कृति के आधार पर चयनित रचनाकारों को पुरस्कार प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार दो वर्ग में विभाजित किया जाता है। एक वर्ग में पुस्तक की श्रेष्ठता के आधार पर और दूसरे वर्ग का पुरस्कार कहानी की श्रेष्ठता के आधार पर दिया जाता है। जिस में प्रथम वर्ग में 5500 रुपए, दूसरे वर्ग में 5100 रुपए और तृतीय वर्ग में 3100 रुपए की राशि के साथ शाल, श्रीफल, प्रमाणपत्र व प्रकाशित पुस्तक दे कर सम्मान पुरस्कृत किया जाता है। प्रत्येक वर्ग में दो-दो रचनाकारों का सम्मान किया जाता है।

संयोजक डॉ. अखिलेश पालरिया ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में 2019 के सम्मान की घोषणा की है। जिस में नीमच ज़िले के प्रसिद्ध बालसाहित्कार ओमप्रकाश क्षत्रिय 'प्रकाश' की कृति 'रोचक विज्ञान बालकहानियां' को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ है। इस चयन फलस्वरूप आप को शब्द निष्ठा सम्मान कार्यक्रम में 3100 रुपए की नगद राशि, शाल, श्रीफल व प्रमाणपत्र आदि दे कर सम्मानित किया जाएगा। इस पुरस्कार हेतु चयनित होने पर साहित्यकार साथियों और इष्टमित्रों ने आप को हार्दिक बधाई दी। इन का कहना है कि यह नीमच क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। स्मरणीय है कि आप को गत वर्ष नेपाल प्रदेश 2 के मुख्यमंत्री लालबाबू राऊतजी द्वारा नेपाल- भारत साहित्य सेतु सम्मान-2018 से नेपाल के बीरगंज में सम्मानित किया गया था।

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08 May 2019
डॉ. गरिमा संजय दुबे के प्रथम कहानी संग्रह 'दो ध्रुवों के बीच की आस' का लोकार्पण

डॉ. गरिमा संजय दुबे के प्रथम कहानी संग्रह 'दो ध्रुवों के बीच की आस' का लोकार्पण

डॉ. गरिमा संजय दुबे के प्रथम कहानी संग्रह 'दो ध्रुवों के बीच की आस' का लोकार्पण

वामा साहित्य मंच की सुपरिचित, लोकप्रिय, युवा लेखिका डॉ. गरिमा संजय दुबे के प्रथम कहानी संग्रह "दो ध्रुवों के बीच की आस" का लोकार्पण एवं चर्चा संगोष्ठी दिनांक 28 अप्रैल 2019 प्रीतम लाल दुआ सभाग्रह, इंदौर में हुआ। समारोह में लेखक व प्रकाशक पंकज सुबीर, वरिष्ठ साहित्यकार मनोहर मंजुल व लेखिका ज्योति जैन ने पुस्तक पर चर्चा की। स्वागत भाषण संस्था की अध्यक्ष पद्मा राजेंद्र ने दिया। आत्मकथ्य में लेखिका ने अपनी रचना प्रक्रिया की जानकारी देते हुए अपनी कहानी में आधुनिक युग की समस्याओं को चित्रित करने की बात की। उन्होंने कहा, "युग बदला है तो समस्याएँ भी बदली हैं, इसलिए हल भी नए होने चाहिए। जीवन में संतुलन का समर्थन करती हूँ लेकिन अतिवाद से बचने का प्रयास रहता है, इसीलिए पुस्तक और एक कहानी का शीर्षक दो ध्रुवों के बीच की आस सूझा।"

ज्योति जैन ने पुस्तक पर अपने विचार रखते हुए कहा, "गरिमा के प्रथम कहानी संग्रह दो ध्रुवों के बीच की आस के प्रथम प्रयास में उनकी कहानियों की परिपक्वता अचंभित करती है।" 

वरिष्ठ पत्र लेखक व साहित्यकार मनोहर मंजुल ने अपने वक्तव्य में कहानियों पर चर्चा करते हुए कहा, "गरिमा की कहानियाँ समाज के विभिन्न दृष्टिकोणों को प्रस्तुत करती हैं। उसकी लेखनी समाज के प्रति उसके दायित्व का बोध कराती है।"

प्रकाशक व लेखक पंकज सुबीर ने लेखिका के कहानीकार स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा, "गरिमा का पहला क़दम सधा हुआ और संतुलित है। इनकी कहानियों में विषयों का विस्तृत संसार है। कहानी संग्रह वही सफल होता है, जिसकी कहानियों के पात्रों की छटपटाहट औऱ बैचैनी पाठक अपने में महसूस करें । वही इनकी कहानियों में देखने को मिला है। कहानियों के विषय की विविधता चकित करती है, और गरिमा ने अपने पहले ही कहानी संग्रह से अपने लिए एक बड़ी रेखा खींची है जिसके आगे बहुत और बहुत सी श्रेष्ठ कृतियों की अपेक्षा बढ़ गई है।" सुबीरजी ने कहा, "इंदौर के साहित्यिक कार्यक्रमों में समय की प्रतिबद्धता, कार्यक्रम के प्रति उत्साह, साहित्य की समय के साथ क़दमताल सीखने लायक़ है।

परिवार के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. दीपा मनीष व्यास नेअपने वक्तव्य में गरिमाजी के लिखने से छपने के सफ़र की रोचक और गंभीर चर्चा की।

पंकज सुबीर ने "अब मैं सो जाऊँ", "पन्ना बा" व "जीवन राग" कहानियों के बारे में बात करते हुए कहा कि अब मैं सो जाऊँ आपको बेचैन कर देती है। पन्ना बा में किन्नर जीवन की व्यथा का वर्णन है, और जीवन राग में जीवन की छोटी-छोटी ख़ुशियों व साकार रागात्मकता की बात है। ज्योति जैन ने कहा कि, लिव इन, किन्नर, डूब विषयों पर लेखिका की कहानियाँ गहरे से प्रभावित करती हैं और कहानियों की परिपक्वता व विषयों की विविधता चकित करती है।

इस अवसर पर पारिवारिक मित्रों और संबंधियों के अलावा वरिष्ठ साहित्यकार सरोज कुमार, संजय पटेल, जवाहर चौधरी, सूर्यकांत नागर, डॉ. पद्मा सिंह, सतीश राठी, पुरुषोत्तम दुबे, अश्विनी दुबे,  हरेराम वाजपेयी, प्रदीप नवीन, अशोक शर्मा, सुषमा दुबे समेत नगर के सभी साहित्यकार मौजूद थे। 

अतिथियों का स्वागत मदनलाल दुबे, शांता पारिख, सुभाष चंद्र दुबे, मीनाक्षी रावल, मनीष व्यास तथा भावना दामले ने किया।

सरस्वती वंदना संगीता परमार ने प्रस्तुत की। 

कार्यक्रम का संचालन अंतरा करवड़े ने किया व आभार वसुधा गाडगिल ने माना।

सतीश राठी
आर 451, महालक्ष्मी नगर,
इंदौर452010

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08 May 2019
आचार्य निरंजननाथ पुरस्कारों की घोषणा

आचार्य निरंजननाथ पुरस्कारों की घोषणा

राजसमन्द 6 मई 2019 -

आचार्य निरंजननाथ स्मृति संस्थान द्वारा रविवार को इस वर्ष के पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई। इस बार पुरस्कार उपन्यास, कविता तथा कहानी विधा पर केंद्रित थे। पुरस्कार समिति के संयोजक क़मर मेवाड़ी के अनुसार इस वर्ष यह पुरस्कार सुप्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार और सम्पादक पंकज सुबीर को उनके उपन्यास 'अकाल में उत्सव' पर, सुप्रसिद्ध कवि ओम नागर को उनके कविता संग्रह 'विज्ञप्ति भर बारिश' पर तथा ख्यातनाम कथाकार डॉ. गोपाल सहर को उनके कथा संग्रह 'हवा में ठहरा सवाल' पर प्रदान किए जाएँगे। तीनों पुरस्कारों की राशि इक्कीस-इक्कीस हज़ार रुपये के साथ शाल, प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया जायगा। समारोह 9 जून 2019 रविवार को प्रातः दस बजे गाँधी सेवा सदन राजसमन्द में आयोजित होगा। निर्णायक मण्डल के अध्यक्ष कर्नल देशबन्धु आचार्य की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कथाकार माधव नागदा तथा डॉ. नरेन्द्र निर्मल की महत्त्वपूर्ण भागीदारी रही।

प्रेषक
क़मर मेवाड़ी
संयोजक
आचार्य निरंजननाथ सम्मान समिति 
कांकरोली, राजसमन्द (राजस्थान)

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19 Apr 2019
मानवता की प्रबल वकालत की है प्रदीप श्रीवास्तव ने : शिवमूर्ति 

मानवता की प्रबल वकालत की है प्रदीप श्रीवास्तव ने : शिवमूर्ति 

प्रदीप श्रीवास्तव की कहानियाँ नव उदारवाद, उदारवाद और भूमंडलीकरण की कहानियाँ हैं : हरिचरण प्रकाश 

यूपी प्रेस क्लब, लखनऊ में 7 अप्रैल 2019 को प्रदीप श्रीवास्तव के कहानी संग्रह 'मेरी जनहित याचिका एवं अन्य कहानियां' पर एक परिचर्चा का आयोजन भारतीय जर्नलिस्ट परिषद, अनुभूति संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कथाकार श्री शिवमूर्ति ने कहा कि, "सारे नियम क़ानून से ऊपर है मानवता और इस मानवता की प्रबल वकालत की है प्रदीप श्रीवास्तव ने लेकिन अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर वह देश की वसुधैव कुटुंबकम की भावना को पीछे छोड़ देते हैं।" श्री शिवमूर्ति ने संग्रह की कहानियों की पठनीयता की बात करते हुए कहा कि, "लम्बी कहानियों के बावजूद प्रभावशाली भाषा, रोचकता इतनी है कि आप एक बार कहानी पढ़ना शुरू करेंगे तो बीच में छोड़ नहीं पायेंगे, आख़िर तक पढ़ते चले जायेंगे।" संग्रह की "बिल्लो की भीष्म प्रतिज्ञा" कहानी का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि "महिलाओं को यह कहानी अवश्य ही पढ़नी चाहिए।" उन्होंने "घुसपैठिये से आखिरी मुलाकात के बाद" कहानी का भी ख़ासतौर से उल्लेख किया। 

वरिष्ठ साहित्यकार श्री हरि चरण प्रकाश ने संग्रह पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, "भूमंडलीकरण ने पूँजीवाद के व्यभिचार को और बढ़ाया है। प्रदीप श्रीवास्तव की कहानियाँ नव उदारवाद, उदारवाद और भूमंडलीकरण की कहानियाँ हैं। मैं प्रदीप की कहानिओं को आत्म स्वीकारोक्ति शैली की कहानी कहना चाहूँगा।"

 

 प्रदीप श्रीवास्तव ने अपनी कहानियों के बारे में बताया कि यह कहानियाँ शहरी निम्न मध्यवर्गीय ज़िंदगी की मुख्यतः नकारात्मक स्थितियों का बयान हैं। दरअसल भूमंडलीकरण ने हिंदुस्तानी समाज को अपनी गिरफ़्त में ले लिया है। विकास और बौद्धिकता की आँधी में मानव मूल्य तिरोहित होते जा रहे हैं। लेकिन हमें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते रहना है। तेज़ी से विकसित हो रही टेक्नोलॉजी मानव को निकट भविष्य में कई ग्रहों तक ले जाने में सक्षम होगी, इस आधार पर मैं वसुधैव कुटुंबकम के विचार को और आगे ले जाते हुए ब्रह्मांड कुटुंबकम के विचार को प्रस्तुत करता हूँ। सारी दुनिया से इस पर चिंतन मनन का आग्रह करता हूँ। मेरी जनहित याचिका कहानी का पात्र इस बिंदु पर पूरी गंभीरता से बात करता है। प्राणी मात्र के सुंदर खुशहाल जीवन के लिए हमें इस बिंदु पर गंभीरता से सोचना ही होगा। कार्यक्रम की संचालिका वरिष्ठ लेखिका डॉ. अमिता दुबे का मानना था कि, "प्रदीप की कहानियों में मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना पर विशेष बल है। कहानी के पात्र समाज में परिवर्तन लाने के लिए प्रयासरत रहते हैं।" 

श्री प्रतुल जोशी का कहना था कि, "प्रदीप की कहानियों में चित्रात्मकता है।" वहीं श्री पवन सिंह ने कहा कि, "यह समय जनहित याचिकाओं के सहालग का है।" समापन भाषण देते हुए श्री प्रवीण चोपड़ा ने कहा, "साहित्य वही है जो समग्र समाज का हित सोचे। उसका उद्देश्य समाज की भलाई हो। कार्यक्रम में विख्यात साहित्यिक पत्रिका 'लमही' के संपादक श्री विजय राय, अनुभूति संस्थान के श्री धीरेन्द्र धीर एवं अन्य विशिष्ठजन उपस्थित थे।

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17 Apr 2019
राम तुम्हारा वृत्त स्वयं ही काव्य है…

राम तुम्हारा वृत्त स्वयं ही काव्य है…

हिन्दी राइटर्स गिल्ड की अप्रैल, 2019 मासिक गोष्ठी

 

’हिन्दी साहित्य में राम के विभिन्न रूप’ विषय पर इस शनिवार, 13 अप्रैल 2019 को हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने अपनी मासिक गोष्ठी में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। रामनवमी के पावन अवसर पर हुई इस चर्चा में भाग लेने के लिए लगभग 40 लोग इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। (हिन्दी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठियाँ महीने के दूसरे शनिवार को 1:30 से 4:30 बजे तक स्प्रिंगडेल शाखा, ब्रैम्पटन में आयोजित होती हैं)

 कार्यक्रम का संचालन डॉ. शैलजा सक्सेना ने सँभाला और सभी उपस्थित लेखकों तथा श्रोताओं का स्वागत किया। उन्होंने रामनवमी तथा वैसाखी के पावन पर्वों की शुभकामनाएँ देते हुए भारत से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामेश्वर काम्बोज ’हिमांशु’ जी तथा गिल्ड से जुड़े नए हिन्दी प्रेमियों के प्रति विशेष आभार प्रकट किया। कार्यक्रम की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि आज दो सत्र होंगे। पहले सत्र में ’हिन्दी साहित्य में राम के विभिन्न रूप’ पर चर्चा होगी तथा दूसरे सत्र में रचनाएँ, गीत, ग़ज़लें आदि होंगी।

विषय की प्रस्तावना करते हुए डॉ. शैलजा ने मध्यकाल में तुलसी के सगुण राम और कबीर के निर्गुण राम के आकार-प्रकार में अंतर की अपेक्षा दोनों भक्त कवियों के प्रेम और समर्पण भाव की समानता को अधिक महत्त्वपूर्ण ठहराया। उन्होंने कबीर की राम यानी परमशक्ति राम के प्रति समर्पण की पराकाष्ठा को इस दोहे से रेखांकित किया: 

 “मैं तो कूता राम का, मुतिया मेरा नाँव। 
गले राम की जेवड़ी, जित खींचे तित जाँव”

मध्यकाल के बाद मैथिलीशरण गुप्त जी की ’साकेत’ और फिर निराला की ’राम की शक्तिपूजा’ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राम के भीतर आधुनिक मनुष्य की उद्भावना निराला ने की और राम से कहलवाया; ’धिक जीवन जो पाता ही आया विरोध/ धिक साधन जिसके लिए सदा ही किया शोध’! उन्होंने कहा कि राम द्वारा अपने जीवन को धिक्कार कर, अपने को साधनहीन कहने में एक आम आदमी की पीड़ा दिखाई देती है, सर्वशक्तिशाली भगवान की नहीं। राम के भीतर इसी मानवीयता को प्रश्न और संशय के रूप में श्री नरेश मेहता ने अपने काव्य ’संशय की एक रात’ में दिखाया है जहाँ राम, अपनी व्यक्तिगत समस्या, सीता-हरण पर एक पूरी सेना को मृत्यु की संभावना पर ले जाकर नहीं खड़ा करना चाहते । डॉ. शैलजा ने श्री नरेश मेहता द्वारा गढ़ी राम की मानवीय छवि की बात करते हुए डॉ. नरेन्द्र कोहली के रामकथा पर आधारित उपन्यास की भी चर्चा की जिसमें राम अद्भुत प्रबंधनकर्ता (मैनेजर) दिखाई देते हैं। सर्व-साधन संपन्न लंकेश्वर रावण से साधनहीन आदिवासी जनता को लड़ने के लिए की गई तैयारी को जिस बारीक़ी और गहराई से कोहली जी के राम सँभालते हैं, वह आज के ’मैनेजमेंट’ विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी है।     

आगे चर्चा को विस्तार देने के लिए उन्होंने सर्वप्रथम प्रसिद्ध साहित्यकार श्री रामेश्वर काम्बोज ’हिमांशु’ जी को आमंत्रित किया जिन्होंने श्री नरेश मेहता द्वारा लिखित ’प्रवाद पर्व’ को अपने वक्तव्य का केंद्र बनाते हुए कहा कि इस खंड काव्य में राम राज-नियमों की सत्ता के बीच राजा के बंधन और उससे उत्पन्न पीड़ा को प्रकट करते हुए एक आधुनिक मनुष्य के रूप में दिखाई देते हैं। वे पति रूप में सीता पर संदेह नहीं करते परन्तु राजा के आदर्श को स्थापित करने को भी अपना धर्म समझते हैं। राम जनमानस से उठी हर आवाज़ को ’अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ देना चाहते हैं, हर साधारण जन को भाषा का वह अधिकार देना चाहते हैं जो उन्हें कभी नहीं मिला चाहे इसके लिए उन्हें अपनी प्राण प्रिया को भी छोड़ना पड़े। राम राजा का यह दायित्त्व मानते हैं कि राजा व्यक्तिगत स्वार्थों और सुविधाओं से ऊपर उठा हुआ होना चाहिए। राम का कहना है:

 ’राजभवनों और राजपुरुषों से ऊपर/
राज्य और न्याय/
प्रतिष्ठापित होने दो भरत’

’हिमांशु’ जी के वक्तव्य ने दर्शकों को ’प्रवाद पर्व’ के ’पुराण पुरुष’ राम के लोकनायक रूप से जोड़ा और चर्चा को बहुमुखी बनाया।

 इसके बाद डॉ. इन्दु रायज़ादा जी ने राम पर अपने विचारों से अवगत कराया। साथ ही राम के पति रूप पर संशय जताते हुए मन में उठे कुछ प्रश्नों का ख़ुलासा भी किया। प्रश्न आज के विषय के अनुकूल न होने के कारण चर्चा से अछूते रह गए।

 अगली वक्ता श्रीमती आशा बर्मन जी ने अपने वक्तव्य का आधार ’श्रीरामचरित मानस’ को बनाया। उन्होंने तुलसी द्वारा भाव और भाषा, दोनों को तत्कालीन शास्त्रीय परिभाषाओं से निकाल कर जन-सामान्य से जोड़ने की प्रशंसा की। आशा जी ने कहा कि तुलसी के राम को पूजने के लिए किसी विधि-विधान की आवश्यकता नहीं, उनके राम जन-मन के राम हैं, जिनके लिए तुलसी कहते हैं:  

 ’तुलसी मेरे राम को, रीझ भजो या खीज।
भौम पड़ा जामे सभी, उल्टा सीधा बीज।’

 उनके बाद के वक्ताओं ने राम और उनके गुणों पर लिखित अपनी रचनाएँ तथा वक्तव्य प्रस्तुत किए। श्री सतीश सेठी ने रामराज्य पर रचना पढ़ी तो श्री विद्याभूषण ने अपनी रचना में धरती से आकाश, पौधों से जीव, राम को प्रत्येक वस्तु में विद्यमान बताया। श्री बाल कृष्ण ने राम नाम का महत्व बताते हुए राम धुन या ओम का सही उच्चारण पर बल दिया। श्रीमती प्रमिला भार्गव ने सीता-त्याग से असहमति व्यक्त करते हुए अपनी बात रखी। गिल्ड की सभा में पहली बार उपस्थित हुई श्रीमती अमरजीत कौर ’पंछी’ जी ने गुरुवाणी में राम नाम और भक्ति के महत्व बताते हुए एक सुंदर रचना का पाठ भी किया। श्री अनिल कुन्द्रा जी ने राम नाम के जाप की शक्ति का प्रमाण देते हुए परिवार में घटित सच्ची घटना से अवगत करवाया। श्रीमती कृष्णा वर्मा ने राम के प्रति अपने भाव प्रकट करते हुए कहा कि राम सत्य सनातन है, जीवन का मूल मंत्र हैं, प्रत्येक भोर का स्वर हैं, चरित्र, मर्यादा, शील, संयम और नैतिकता हैं। राम का अनुसरण ही जीवन का सच्चा अर्थ है।

इस कार्यक्रम में पुलिट्ज़र पुरस्कार से सम्मानित श्री बैरी ब्राउन भी, अपनी लोक-संपर्क अधिकारी श्रीमती रेनु मेहता के साथ उपस्थित थे। श्री बैरी ब्राउन ने एक किताब ’द वर्ल्ड बिफ़ोर रिलीजन, वार एंड इनैक्यैलिटी’ लिखी है जिसमें महाभारत के युद्ध को विश्व का पहला बड़ा युद्ध बताया है। उन्होंने अपने संक्षिप्त वक्तव्य में अपनी लंबी रिसर्च और उससे निकले तथ्यों के आधार पर कृष्ण वंशज यादवों से ही ज्यूज़ के होने और ब्राह्मण धर्म से ज्यूडिज़्म के होने को बताया। समय कम होने से वे अगली गोष्ठी में फिर आएँगे और दर्शकों के प्रश्नों के उत्तर भी देंगे।  

 कार्यक्रम के दूसरे सत्र में उन लोगों ने कविता पढ़ी जिन्होंने पहले सत्र में भाग नहीं लिया था। इस का प्रारंभ अखिल भंडारी जी की ग़ज़ल से हुआ जिसे बहुत पसंद किया गया:

’ये माना ज़िन्दगी तो एक सफ़र है
सफ़र में हैं मगर, जाना किधर है’

दूसरी वक्ता थीं, श्रीमती भुवनेश्वरी पांडे, जिन्होंने ’श्री रामचन्द्र कृपालु भज मन हरन भव भय दारुनम’ श्री राम की स्तुति का मधुर गायन किया। तत्पश्चात मन के विभिन्न पहलुओं की पर्तें खोलती सुरजीत कौर जी की कविता ’तपोवन’ ने मन को छू लिया। डॉ. नरेन्द्र ग्रोवर जी ने आज ही के दिन सौ वर्ष पहले घटी जलियाँ वाला बाग की घटना को याद करते हुए सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता ’जलियाँवाला बाग में बसंत’ का पाठ किया। जिसकी पंक्तियाँ थीं:-

’कोमल बालक मरे यहाँ गोली खा कर
कलियाँ उनके लिए गिराना थोड़ी लाकर” 

श्रीमती पूनम चन्द्रा ’मनु’ ने अपनी कविता में रिश्तों के बदलते रूप की बात की:

"जाने ये रिश्ते क्यों चेहरा अपना बदल लेते हैं
भूल जाते हैं जिन्हें पल में ग़ैरों की तरह
वे ही नाम पत्थरों पर साथ लिखे मिलते हैं’

श्रीमती रिंकु भाटिया जी ने अपने मधुर स्वर में एक लोक गीत ’माँए मेरिए नी/ शिमले दी राहे/ चम्बा कितनी दूर’ का गायन कर सबको विभोर किया।

अंत में डॉ. शैलजा ने अपना एक हाइकु – ’लिख वक़्त के/ सीने पे विश्वास की/ नई लिखाई’ कहते हुए सबका धन्यवाद देकर कार्यक्रम का समापन किया।

बदलते मौसम का ख़ूबसूरत सुहाना दिन था। कार्यक्रम आत्मीय-संवाद पूर्ण होने से उपजे आनंद पूर्ण रहा, साथ ही इस पावन पर्व पर गर्मा-गरम चाय, समोसे, बर्फी, लड्डू तथा जलेबियों का सबने भरपूर आनंद उठाया। इस जलपान का प्रायोजन श्रीमती कैलाश महंत, मीनाक्षी सेठी तथा कृष्णा वर्मा ने किया था।  

- प्रस्तुति कृष्णा वर्मा एवं डॉ. शैलजा सक्सेना

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14 Apr 2019
‘प्रवासी हिंदी साहित्य : संवेदना के विविध संदर्भ’ विषयक द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

‘प्रवासी हिंदी साहित्य : संवेदना के विविध संदर्भ’ विषयक द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

मैसूर, 8 मार्च, 2019 -  प्रवासी हिंदी साहित्य का परिदृश्य वैश्विक बनता जा रहा है। हिंदी में रचे जा रहे प्रवासी साहित्य का अपना वैशिष्ट्य है जो उसकी संवेदना, परिवेश, जीवन दृष्टि तथा सरोकारों में दिखाई देता है। इसी कड़ी में कर्नाटक की पारंपरिक नगरी मैसूर के हिंदी अध्ययन विभाग, मैसूर विश्वविद्यालय, मानसगंगोत्री, मैसूर तथा केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में ‘प्रवासी हिंदी साहित्य : संवेदना के विविध संदर्भ’ विषयक द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, मैसूर विश्वविद्यालय के बहादुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेनेजमेंट के सभागार में आयोजित की गई। 

इस अवसर पर ब्रिटेन की प्रख्यात हिंदी लेखिका उषा राजे सक्सेना प्रमुख अतिथि रही। उद्घाटन भाषण में उन्होंने विदेशों में हिंदी साहित्य सृजन के परिवेश, स्वरूप, विषय-वस्तु, महत्वाकांक्षाओं और चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा - “प्रवासी भारतीय रचनाकारों की लेखन-शैली, शब्द-संस्कृति, संवेदना, सरोकार और स्तर मुख्यधारा के लेखन से भिन्न रही है। इसी भिन्नता के कारण प्रवासी हिंदी लेखन ने हिंदी साहित्य के मुख्यधारा के पाठकों को एक नई दृष्टि, एक नई चेतना, एक नई संवेदना और एक नई उत्तेजना भी दी है।” विदेशों में लिखे जा रहे सृजनात्मक हिंदी साहित्य पर अपने विचार प्रकट करते हुए उषा राजे सक्सेना का यह मानना है कि प्रवासी रचनाकारों को अपने साहित्य को बरकरार रखने के लिए अपने कैनवस को और अधिक विशाल करना होगा।

उद्घाटन सत्र में प्रो.आर.शशिधरन, कुलपति, विज्ञान तथा तकनीकी विश्विविद्यालय, कोचिन ने बीज भाषण में प्रवासी साहित्यकारों की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि रचनाकारों ने अपने वतन से दूर रहकर अपनी रचनाओं के ज़रिये हिंदी भाषा और हिंदी साहित्य को गौरवान्वित करने का सराहनीय कार्य किया है तथा प्रवासी जीवन की संवेदना की अभिव्यक्ति ही प्रवासी साहित्य में मुखर हुई है।

प्रो. प्रतिभा मुदलियार की अध्यक्षता और मार्गदर्शन में इस द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन हुआ। संगोष्ठी में मॉरीशस, फीजी, चीन और ब्रिटन से प्रतिभागी आए थे। अध्यक्षीय भाषण में प्रो. प्रतिभा मुदलियार ने संगोष्ठी के मूल उद्देश्य को प्रतिपादित करते हुए कहा कि विदेशों में बसे भारतीय मूल के लेखकों के साहित्य को समझने के लिए उनका जीवन संघर्ष, मानवीय जीवन तथा सामाजिक परिवेश आदि को जानना जुरूरी है। इस अवसर पर उनके द्वारा संपादित पुस्तक ‘प्रवासी हिंदी साहित्य : संवेदना के विविध संदर्भ’ का लोकार्पण भी संपन्न हुआ। 
मुख्य अतिथि के रूप में मंचासीन केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के प्रो. रामवीर सिंह ने कहा कि प्रवासी साहित्य नोस्टेलिजिया का साहित्य होते हुए भी विभिन्न संवेदनाओं को लेकर चलता है। 

उद्घाटन सत्र के अध्यक्ष्य प्रो. लिंगराज गांधी, कुलसचिव, मैसूर विश्वविद्यालय, मैसूर ने हिंदी विभाग को इस प्रकार के आयोजन के लिए बधाई दी और साहित्य में प्रवासी लेखकों के योगदान को रेखांकित किया।

समापन सत्र के प्रमुख अतिथि के रूप में प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का मूल्यांकन करते हुए कहा कि प्रवासी साहित्य हिंदी सहित कई और भारतीय भाषाओं में भी लिखा जा रहा है और उसका महत्व आज के युग में बहुत अधिक है। उनका यह कहना था कि इस साहित्य की ओर आलोचकों को व्याख्याकार के दृष्टिकोण से देखना आवश्यक है। इस संगोष्ठी के दौरान प्रो.ऋषभदेव शर्मा की पुस्तक ‘संपादकीयम्’ का लोकार्पण भी हुआ। समापन सत्र में प्रो. टी. आर भट्ट, मुखय अतिथि और प्रो. शशिधर एल. गुडिगेनवर अध्यक्ष के रूप में उपस्थित थे।

संगोष्ठी के अंतर्गत आठ अकादमिक और समांतर सत्रों में सत्तर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इन सत्रों की अध्यक्षता डॉ. ऋषभदेव शर्मा, डॉ. रामनिवास साहु, डॉ. रामप्रकाश, डॉ. शशिधर एल. जी., डॉ. शुभदा वांजपे, डॉ. सतीश पांडेय, डॉ. नामदेव गौड़ा और उषा राजे सक्सेना ने की।   

पहले दिन रंगारंग सांस्कृतिक संध्या का आयोजन मुख्य रूप से आकर्षण का केंद्र रहा जिसमें कर्नाटक की लोक संस्कृति को व्यक्त करने वाली संगीतमय प्रस्तुतियों के अलावा ‘अंधेर नागरी’ और ‘वापसी’ के नाट्य रूपांतरण ने समां बाँध दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रेखा अग्रवाल एवं अन्य प्राध्यापकों ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एम. वासंति ने किया।

प्रेषक – डॉ. प्रतिभा मुदलियार 
विभागाध्यक्ष 
हिंदी अध्ययन विभाग 
मैसूर विश्वविद्यालय
मानसगंगोत्री 
मैसूर – 570006 

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14 Apr 2019
ऋषभदेव शर्मा की पुस्तक 'संपादकीयम्' लोकार्पित

ऋषभदेव शर्मा की पुस्तक 'संपादकीयम्' लोकार्पित

मैसूर, 7 मार्च, 2019 - मैसूर विश्वविद्यालय और केंद्रीय हिंदी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतर्गत उच्च शिक्षा और शोध संस्थान के पूर्व आचार्य डॉ. ऋषभदेव शर्मा की सद्यःप्रकाशित पुस्तक 'संपादकीयम्' का लोकार्पण ब्रिटेन से पधारी प्रख्यात प्रवासी हिंदी साहित्यकार उषा राजे सक्सेना के हाथों संपन्न हुआ। पुस्तक की प्रथम प्रति छत्तीसगढ़ी कथाकार डॉ. रामनिवास साहु ने ग्रहण की। कार्यक्रम संयोजक प्रो. प्रतिभा मुदलियार ने कहा कि यह पुस्तक समसामयिक विषयों पर निष्पक्ष संपादकीय टिप्पणियों का ऐसा संग्रह है जिसमें वर्तमान समय के सभी विमर्श विद्यमान हैं। अवसर पर फिजी से पधारे खेमेंद्र कमल कुमार तथा सुभाषिणी शिरीन लता, चीन से पधारे प्रो. बलविंदर सिंह राणा और मॉरीशस से पधारी लेखिका दिया लक्ष्मी बंधन ने लेखक को शुभकामनाएँ दी। 

केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के प्रो. रामवीर सिंह ने पुस्तक पर बातचीत में कहा कि संपादकीय टिप्पणियों का प्रकाशन एक अच्छी शुरूआत है क्योंकि इनसे समकालीन इतिहास लेखन के लिए पर्याप्त आधार सामग्री मिल सकती है।

    • डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा 
सह संपादक ‘स्रवंति’ 
असिस्टेंट प्रोफ़ेसर 
उच्च शिक्षा और शोध संस्थान 
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा 
खैरताबाद 
हैदराबाद – 500004 

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14 Apr 2019
ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका तथा शिवना प्रकाशन का साहित्य समागमसंपन्न

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका तथा शिवना प्रकाशन का साहित्य समागमसंपन्न

 

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अमेरिका तथा शिवना प्रकाशन का संयुक्त आयोजन ‘साहित्य समागम’ राज्य संग्रहालय, भोपाल के सभागार में आयोजित किया गया। इस समारोह में देश भर के साहित्यकारों ने भाग लिया। समारोह में ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अमेरिका के प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन के कथा-कविता सम्मान प्रदान किए गए। दिन भर चले इस समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकार उपस्थित थे।

कार्यक्रम का शुभारंभ ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन की अध्यक्ष डॉ. ओम ढींगरा तथा उपाध्यक्ष डॉ. सुधा ओम ढींगरा ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। तीन सत्रों में आयोजित हुए इस समागम में शिवना प्रकाशन की पुस्तकों का विमोचन तथा रचना पाठ भी शामिल रहा, जिसमें हिन्दी के महत्त्वपूर्ण साहित्यकारों ने भाग लिया। प्रथम सत्र ‘सम्मानित रचनाकारों का पाठ’ की अध्यक्षता डॉ. उर्मिला शिरीष ने की तथा मुख्य अतिथि श्री महेश कटारे थे। इस सत्र में सम्मानित रचनाकारों ने अपनी सम्मानित रचनाओं का पाठ किया। सम्मानित रचनाकारों की कृतियों पर श्री बलराम गुमाश्ता, श्री विनय उपाध्याय, श्री समीर यादव तथा डॉ. गरिमा संजय दुबे ने   टिप्पणी  की। 

दूसरे सत्र ‘अलंकरण समारोह’ में अध्यक्षता श्री संतोष चौबे ने की जबकि मुख्य अतिथि श्री पलाश सुरजन थे। सभी सम्मानों के तहत सम्मान राशि, शॉल, श्रीफल तथा सम्मान पट्टिका प्रदान की गई। सम्मान समारोह में प्रदान किए गए सम्मानों में ‘ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन लाइफ़ टाइम सम्मान’ डॉ. कमल किशोर गोयनका को, ‘ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान’ उपन्यास विधा में मनीषा कुलश्रेष्ठ को उपन्यास ‘मल्लिका’ हेतु तथा कहानी विधा में मुकेश वर्मा को कहानी संग्रह ‘सत्कथा कही नहीं जाती’ हेतु प्रदान किया गया। शिवना प्रकाशन का ‘शिवना कथा सम्मान’ गीताश्री को उपन्यास ‘हसीनाबाद’ के लिए, ‘शिवना कविता सम्मान’ वसंत सकरगाए को कविता संग्रह ‘पखेरू जानते हैं’ तथा ‘शिवना कृति सम्मान’ उपन्यास ‘पार्थ तुम्हें जीना होगा’ के लिए कथाकार, कवयित्री ज्योति जैन को प्रदान किया गया। 

तीसरे सत्र ‘विमोचन समारोह’ में शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित बीस पुस्तकों का विमोचन किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. प्रेम जनमेजय ने की जबकि मुख्य अतिथि के रूप में श्री शशिकांत यादव उपस्थित थे। इस अवसर पर बोलते हुए श्री संतोष चौबे ने कहा कि बड़ी प्रसन्नता की बात है कि भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है, इससे भोपाल की साहित्यिक गतिविधियों को और बल मिलेगा। श्री पलाश सुरजन ने साहित्य की विधाओं के बीच पारस्परिक अंर्तसंबंधों पर काम किए जाने की बात कही, तथा देश के बाहर काम कर रहे हिन्दी सेवियों की सराहना की। डॉ. उर्मिला शिरीष ने कहा कि भोपाल में एक नई शुरूआत आज होने जा रही है, जो कार्यक्रम पूर्व में अमेरिका और कैनेडा में आयोजित हुआ अब वह भोपाल में आयोजित हो रहा है। श्री महेश कटारे ने कैनेडा यात्रा के अपने संस्मरण सुनाते हुए फ़ाउण्डेशन को साधुवाद दिया। डॉ. प्रेम जनमेजय ने शिवना प्रकाशन और ढींगरा फ़ाउण्डेशन द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्थाएँ बड़ा काम कर रही हैं। श्री शशिकांत यादव ने कहा कि भविष्य में यह दोनो संस्थाएँ हिन्दी साहित्य की प्रमुख संस्थाएँ होंगी। डॉ. कमल किशोर गोयनका ने ढींगरा फ़ाउण्डेशन द्वारा किए जा रहे साहित्यिक और सामाजिक कार्यों का ज़िक्र करते हुए फ़ाउण्डेशन की मुक्त कंठ से सराहना की। अंत में आभार ढींगरा फ़ैमिली फाउण्डेशन की उपाध्यक्ष डॉ. सुधा ओम ढींगरा ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन पंकज सुबीर ने किया


श्रवण मावई 
मीडिया प्रभारी

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30 Mar 2019
’केसरिया फागुन’: हिन्दी राइटर्स गिल्ड की पुलवामा शहीदों को रचनात्मक श्रद्धांजलि

’केसरिया फागुन’: हिन्दी राइटर्स गिल्ड की पुलवामा शहीदों को रचनात्मक श्रद्धांजलि

हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने ९ मार्च २०१९ को ब्रैमप्टन की स्प्रिंगडेल शाखा लाइब्रेरी में दोपहर १.३० से ४.३० बजे एक विशिष्ट कार्यक्रम ’केसरिया फागुन’ आयोजित करके पुलवामा के शहीदों को रचनात्मक श्रद्धांजलि दी। 

भीषण शीत और हवा के बाद भी लगभग चालीस लोगों के बीच यह विशिष्ट कार्यक्रम समय पर आरंभ हुआ। इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रीमती शैलजा सक्सेना ने किया। उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए सभी श्रीताओं से १ मिनट का मौन रखने का आग्रह किया। भारत में उत्पन्न कठिन स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ प्रश्न युद्ध का नहीं बल्कि आतंक को समाप्त करने का है क्योंकि हमारे वीर लड़ते हुए शहीद नहीं हुए अपितु षड़यंत्र का शिकार होकर शहीद हुए हैं। ऐसे वातावरण में बात युद्ध और शांति की नहीं, आतंक समाप्त करने की होनी चाहिये और इस कार्य में लेखक अपने सामाजिक दायित्त्व को समझते हुए महती भूमिका निभा सकता है। शैलजा जी ने सर्वप्रथम श्रीमती आशा बर्मन को मंच पर आमंत्रित किय। आशा जी ने प्रदीप जी के एक सुप्रसिद्ध गीत "ऐ मेरे वतन के लोगों” गाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और यह भी कहा कि कई दशक प्रवास में रहने पर भी एक भारतीय सदा स्वदेश से जुड़ा रहता है। उनकी इस भावपूर्ण प्रस्तुति ने सभी की आँखें नम कर 

इसके पश्चात् डॉ. जगमोहन सिंह सांगाजी को  मंच पर आमंत्रित किया गया। उन्होंने कहा कि इतने समय से हम इतने युद्धों के परिणाम देखने के बावजूद भी युद्ध कर रहे हैं। शायद हम अभी तक अच्छे इंसान नहीं बन सके। उन्होंने अपनी कविता में एक अच्छा इंसान बनने का सन्देश देते हुए कहा कि सभी अच्छा बनने की कोशिश करें तो ही संसार बेहतर हो सकता है।

निर्मल सिद्धू जी ने एक अत्यंत मर्मस्पर्शी रचना सुनाई, "हम शहीदों की शहादत को न भुला पायेंगे”। इसके बाद श्री इकबाल बरार जी ने अपने मधुर स्वर में देशभक्ति का गीत ’ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन’ को गाकर सुनाया।

इसके पश्चात श्री बालकृष्ण जी ने कविता पाठ के साथ साथ युद्ध का एक अत्यंत रोचक समाधान प्रस्तुत किया। उनके अनुसार यदि वैज्ञानिक परमाणु बम के स्थान पर एक ऐसा ‘शांति बम’ निर्मित कर सकें जिसके डालने से सबके मन में शांति हो जाए तो संभवत: विश्व में शांति की स्थापना की जा सकती है। तदुपरांत श्री सतीश सेठी जी ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए युद्ध बँदी वीरों की स्थिति पर अपनी मार्मिक कविता सुनाई। उनकी कविता ने यह सोचने पर बाध्य किया कि शहीदों को तो हम सम्मानित करते हैं पर जो वीर शारीरिक और मानसिक प्रताड़नाएँ, आघात और अंग-भंग की कठोर स्थिति को झेलते हुए दुश्मनों के कब्ज़े में आ जाते हैं, उनके और उनके परिवार को हम भूल जाते हैं।

दीपक राज़दान जी ने सभा में युद्ध को स्थिति के अनुसार आवश्यक बताते हुए कहा कि युद्ध चाहें जितना भी विध्वंसात्मक हो पर कभी-कभी आत्मरक्षा के लिए आवश्यक भी हो जाता है इसीलिए श्रीकृष्णजी ने अर्जुन को युद्ध करने के लिए प्रेरित किया था।

श्रीमती सीमा बागला प्रथम बार मासिक गोष्ठी में आयीं थीं, अपनी सुन्दर कविता में आवश्यकतानुसार युद्ध की भेरी बजाने का आह्वान करते हुए उन्होंने सन्देश दिया कि समय आ गया है कि एकबार फिर से अर्जुन गांडीव उठायें। इसके बाद श्रीमती आशा मिश्रा ने प्रसादजी का उद्बोधन गीत ’हिमाद्री तुंग श्रृँग से’ गाकर प्रस्तुत किया। 

इसके पश्चात श्री राज माहेश्वरी ने भारतीय राजनीति के ऐतिहासिक गुजराल सिद्धांतों की चर्चा कर भारत और उसके पड़ोसी देशों के संबंधों की चर्चा की।

श्री नरेन्द्र ग्रोवर ने एक अत्यंत मार्मिक रचना पढ़ी जिसका भाव था कि शहीदों के जीवन के कष्टों को शब्दों में कैसे बाँधू? उन्होंने सही ही कहा कि हर शब्द और श्रद्धाँजलि शहीदों की वीरता और त्याग के सामने अपूर्ण है।

तदुपरांत पूनम चन्द्र ‘मनु’ ने शहीदों के जीवन की आहुति को व्यर्थ न जाने देने की बात करते हुए वीर रस की एक अत्यंत प्रभावशाली रचना सुनाईं; “चिंघाड़ो कि तुम भारत हो, जब तक शत्रु न मिट जाए ।
भूल जाओ तुम बुद्ध के वंशज हो, भूल जाओ तुम बुद्ध के वंशज हो
शिव बन कर ताण्डव करो…रणचण्डी बन रक्तपात करो ...”

श्रीमती कृष्णा जी अपनी क्षणिकाएँ सुनाकर सबको मुग्ध कर दिया।

अंत में सुश्री अरूज राजपूत जी ने शहीदों को नमन करते हुए इन कठिन परिस्थितियों में शांति का आह्वान किया। वे यू. एन. ओ. में भी ’पीस डेलिगेशन’ के सदस्य के रूप में जा चुकी हैं। उन्होंने अपनी कविता में "किनारे-किनारे अमन के पौधे लगाने" की बात की। अरूज जी इस गोष्ठी की अंतिम वक्ता थीं। 

कार्यक्रम का आरम्भ सभी अतिथियों का स्वागत श्री अरुण कुमार बर्मन तथा श्रीमती आशा बर्मन द्वारा लाए गए स्वादिष्ट जलपान और दीपक राज़दान द्वारा लाए गए गर्म कशमीरी कहवा द्वारा किया गया था। भावनाओं और विचारों की संतुलित रचनात्मक धारा के बीच डॉ. शैलजा सक्सेना ने सफल संचालन करते समय बीच-बीच में युद्ध और शांति के विभिन्न पहलुओं पर हिंदी के वरिष्ठ कवियों की रचनाओं के उदाहरण भी दिये जैसे दिनकर, नरेश मेहता इत्यादि जिससे उनके संचालन ने श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। इस प्रकार  हिन्दी राइटर्स गिल्ड द्वारा शहीदों को एक अत्यंत भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी।

-आशा बर्मन

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30 Mar 2019
विज्ञान लोकप्रियकरण के लिए डॉ. ज़ाकिर अली 'रजनीश' को राष्ट्रीय विज्ञान संचार पुरस्कार

विज्ञान लोकप्रियकरण के लिए डॉ. ज़ाकिर अली 'रजनीश' को राष्ट्रीय विज्ञान संचार पुरस्कार

विज्ञान इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि वह हमें सुख और सुविधा के साधन मुहैया कराता है, वह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि हमें तर्कपूर्ण और विचारशील बनाने के लिए भी प्रेरित करता है। और इस नज़रिए से समाज को परिचित कराने में विज्ञान संचारकों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसके लिए उनकी जितनी सराहना की जाए कम है।

उक्त बातें विज्ञान दिवस के अवसर पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान संचार पुरस्कार वितरण समारोह में सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार, प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने कहीं। इस पर लखनऊ के लोकप्रिय लेखक और 'साइंटिफिक वर्ल्ड' के सम्पादक डॉ. ज़ाकिर अली 'रजनीश' को बच्चों के मध्य विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान संचार पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें दो लाख रूपये, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किये गये।

इस अवसर पर पर प्रिंट मीडिया के लिए हुद्रम बीरकुमार सिंह, मणिपुर, मनींद्र कुमार मजूमदार, असम, प्रोफेसर मानसी गोस्वामी, उड़ीसा को, बच्चों के मध्य विज्ञान लोकप्रियकरण के लिए रूरल एग्रीकल्चरल डेवलेपमेंट सोसायटी, आंध्र प्रदेश, डॉ. राजकुमार उत्तर प्रदेश को अनुवाद के लिए प्रोफे. मनीष रत्नाकर जोशी, परम्परागत माध्यम के लिए डॉ. बृजमोहन शर्मा, उत्तराखण्ड, डॉ. सुनीता झाला राजस्थान, व इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए डॉ. अंकुरन दत्ता, असम को भी पुरस्कृत किया गया।

बच्चों के मध्य विज्ञान विज्ञान लोकप्रियकरण के लिए राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार से सम्मानित होने वाले डॉ. ज़ाकिर अली 'रजनीश' देश के जाने-माने रचनाकार हैं, जो अपनी विज्ञान कथाओं के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। डॉ. रजनीश गत दो दशकों से बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने वाले साहित्य का सृजन कर रहे हैं। उनकी 60 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे हिंदी की लोकप्रिय ब्लॉग पत्रिका 'साइंटिफिक वर्ल्ड' के सम्पादक हैं, जो देश की आई.एस.एस.एन. नम्बर प्राप्त इकलौती हिन्दी ब्लॉग पत्रिका है। इसके अलावा वे 'साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन', 'सर्प संसार' और 'टेकगेप' नामक ब्लॉग पत्रिकाओं के द्वारा भी विज्ञान संचार की अलख जला रहे हैं।

बताते चलें कि डॉ. रजनीश 'तस्लीम' (टीम फॉर साइंटिफिक अवेयरनेस आन लोकल इश्यूज़ इन इंडियन मॉसेस) नामक संस्था के महासचिव भी हैं और इसके माध्यम से विज्ञान संचार सम्बंधी सम्मेलन, गोष्ठी और कार्यशालाओं का आयोजन करते रहते हैं , जिनसे अबतक हजारों बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं। डॉ. ज़ाकिर अली 'रजनीश' की इन उपलब्धियों के लिए उन्हें अब तक बॉब्स अवार्ड, जर्मनी, कथा महोत्सव पुरस्कार, शारजाह, यू.ए.ई. सहित तीन दर्जन से अधिक पुरस्कार/सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

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29 Mar 2019
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम : अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो व्यंग्य संग्रह

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम : अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो व्यंग्य संग्रह


 दिनांक 20 मार्च 2019: स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी भोपाल - 


श्री सुदर्शन कुमार सोनी की पुस्तक ’अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो’ का विमोचन दिनांक 20 मार्च 2019 को स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी भोपाल में लब्ध प्रतिष्ठित व्यंग्यकार ’पदमश्री’ डॉक्टर ज्ञान चतुर्वेदी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित एक कार्यक्रम में किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री मकरंद देऊस्कर आईजी इंटेलीजेंस तथा वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री शांतिलाल जैन उपस्थित थे। 

व्यंग्य पुरोधा डॉक्टर ज्ञान चर्तुवेदी जी ने इस अवसर पर कहा कि सुदर्शन की वर्तमान पुस्तक व्यंग्य में एक नया प्रयोग कह सकते हैं। पूरे चौंतीस व्यंग्य कुत्तों पर हैं। व्यंग्य अपने आप में मज़ेदार हैं। इस संग्रह में उनका भोगा हुआ यथार्थ भी दिखता है। कुत्तों पर आप असीमित लिख सकते हो। किसी ने कहा कि ये देश का पहला ऐसा संग्रह है। एक कुत्ता अपने मालिक से निस्वार्थ प्रेम प्यार करता है। नया विषय तो है इसके कई व्यंग्य में तो वे गहराई पर गये हैं लेकिन कई अन्य में विकसित होने की और संभावनायें हैं। मेरी ज़्यादा सहानुभूति गली-कूचे के कुत्तों से है। उनका कोई ठिकाना नहीं है कि सुबह रोटी मिली तो शाम को कुछ मिलेगा कि नहीं? कहाँ कब कौन लतिया दे पत्थर मार दे! मेरे प्रत्येक उपन्यास में कुत्ते की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है जबकि मैंने स्वयं कभी कुत्तापालन नहीं किया।


श्री मकरंद देऊस्कर आईजी (इंटेलीजेंस) ने कहा कि सुदर्शन सोनी की किताबों की ताज़ी प्रति मुझे मिल जाती है। आज का जो व्यंग्य संग्रह है यह लाजबाब है पूरा कुत्तामय होकर लिखा है उन्होंने। मैंने भी कुत्तापालन किया है लेकिन मात्र एक रात के लिये और उसी में मैंने कुत्ते के पूरे रूप जो इस पुस्तक के अलग-अलग व्यंग्यों  में अलग-अलग तरह से वर्णिंत हैं, देख लिये। 

भोजपाल साहित्य संस्थान के अध्यक्ष प्रियदर्शी खैरा ने कहा कि सुदर्शन का रचनाकर्म मैं लगातार कई सालों से देख रहा हूँ। ख़ास बात तो यह है कि वे शासकीय सेवा के विभिन्न दायित्वों को पूर्ण कुशलता से निभाते हुये भी लगातार सृजनशीलता बनाये रखे हुये हैं। ख़ुशी की बात है कि भोजपाल साहित्य संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष का एक और संकलन आया है। श्री खैरा ने कहा कि केवल कुत्तों पर ही केन्द्रित व्यंग्य संग्रह पूरे देश क्या पूरे ब्रह्मांड में पहले कभी नहीं आया है! इनका यह तीसरा व्यंग्य संग्रह है उन्होंने इस संग्रह के माध्यम से कुछ नये शब्दों को भी गढ़ डाला है। कुत्तों की दिनचर्या, उनकी आदतों, अच्छाइयों, बुराइयों का इन्होंने माइक्रोस्कोपिक विश्लेषण अपने व्यंग्यों में किया है। उन्होंने लेखक की धर्मपत्नी डॉक्टर सीमा सोनी व सुपुत्री सुभुति का भी व्यंग्य पाठ हेतु आभार माना।

सुदर्शन सोनी ने कहा कि इंसान को कुत्तों के प्रति अपने नज़रिये को बदलने की ज़रूरत है; वह वैसा नहीं है जैसा कि अधिकांश लोग समझते हैं। संग्रह के व्यंग्य पिछले दस सालों में लिखे गये हैं। उन्होंने इस संग्रह को अपने प्रिय कुत्ते राॅकी जिसका दो साल पहले आकस्मिक अवसान बीमारी से हो गया था को श्रंद्वाजलि देने का एक तरीक़ा बताया। लेखक ने पुस्तक के कार्टून रचियता श्री हरिओेम तिवारी का विशेष आभार माना। जिन्होंने अत्यंत कम समय में पुस्तक के लिये बेहतरीन कार्टून बना उसे और आकर्षक बनाया। भोजपाल साहित्य संस्थान व धर्मपत्नी डॉक्टर सीमा पुत्र अभ्युदय व पुत्री सुभुति का भी विशेष आभार माना। लेखक ने पुस्तक से ही एक व्यंग्य ’जेनरेशन गैप इन कुत्तापालन’ का वाचन किया। सुभुति सोनी ने ’अगले  जनम मोहे कुत्ता कीजो’ रचना का वाचन किया जिसे उपस्थित साहित्य प्रेमियों द्वारा सराहा गया। स्वामी विवेकानंद लायब्रेरी के प्रबंधक रनवीर सिंह सहायक प्रबंधक श्री यतीश भटेले का भी आभार लेखक ने किया। 

वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री शांतिलाल जैन ने पुस्तक के व्यंग्यों पर एक आलोचनात्मक वक्तव्य दिया। उन्होने कहा कि आज जब शब्दों की हत्या का समय चल रहा है तब लेखक ने इस संग्रह में कुछ नये शब्दों जैसे ’जेबकुतरा’ को गढ़ा है। कुत्तों के प्रतीक के माध्यम से उन्होने सर्वहारा वर्ग की तकलीफ़ों को सामने लाने का कार्य किया है। उन्होंने कुत्तों को न जाने कितने कोणों से परखा है। जब विषय एक हो तो ज़्यादा लिखने की गुंजाइश नहीं रहती लेकिन सुदर्शन सोनी जी ने यह साहस किया है। सारे व्यंग्यों के केन्द्र पर कुत्ता ही है। हाँ, ऐसा संग्रह हिंदी व्यंग्य में पहले कभी नहीं आया है। वे एक सजग व्यंग्यकार हैं।

कार्यक्रम का सफल व प्रभावी संचालन साहित्यकार श्री चन्द्रभान राही ने किया। कार्टूनिस्ट श्री हरिओम तिवारी द्वारा पुस्तक के व्यंग्यों को बहुचर्चित जर्जर भोपाली के किरदार के माध्यम से कॉमेडी के रूप में प्रस्तुत करके उपस्थित साहित्यकारों व साहित्य पे्रमियों की वाहवाही लूटी। 

आभार प्रदर्शन भोजपाल साहित्य संस्थान के सक्रिय पदाधिकारी श्री जगदीश किंजल्क ने किया। उन्होंने कुत्तों के संबंध मे हरिशंकर जी परसाई के एक प्रसंग का भी उल्लेख किया कि कैसे परसाई जी जो कभी आकाशवाड़ी जबलपुर नहीं आये थे वे कुत्तों के शोर के कारण रिकार्डिंग हेतु आकाशवाणी आये। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार साहित्य प्रेमी व अधिकारीगण उपस्थित थे। 

प्रियदर्शी खैरा 
अध्यक्ष भोजपाल साहित्य संस्थान 
90-91 यशोदा विहार चूना भट्टी भोपाल 

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29 Mar 2019
छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘मोर दुलरुआ’ और बड़का दाई’ लोकार्पित

छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘मोर दुलरुआ’ और बड़का दाई’ लोकार्पित

मैसूर, 3 मार्च, 2019  - 

केंद्रीय हिंदी संस्थान के व्याख्यान कक्ष में संपन्न क्षेत्रीय निदेशक डॉ. राम निवास साहू के सेवा निवृत्ति समारोह के अवसर पर उनकी दो छत्तीसगढ़ी पुस्तकों 'मोर दुलरुआ' (जीवनीपरक उपन्यास) और 'बड़का दाई' (अनुवाद : डॉ. गीता शर्मा) का लोकार्पण किया गया। अध्यक्षता मैसूर विश्वविद्यालय की प्रो. प्रतिभा मुदलियार ने की। बतौर मुख्य अतिथि लोकार्पण प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने किया। एनसीईआरटी के डॉ. सर्वेश मौर्य और केंद्रीय हिंदी संस्थान के डॉ. परमान सिंह ने लोकार्पित पुस्तकों की समीक्षा प्रस्तुत की। वल्लभविद्यानगर से पधारे डॉ. योगेन्द्रनाथ मिश्र तथा हैदराबाद से पधारे चंद्रप्रताप सिंह ने शुभाशंसा व्यक्त की। इस अवसर पर आशा रानी साहू, शशिकांत साहू, श्रीकांत साहू और श्रीदेवी साहू ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। नराकास-मैसूर के प्रतिनिधियों के अलावा डॉ. साहू के गृहनगर कोरबी-छत्तीसगढ़ से आए समूह के सदस्यों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी निबाही।

• डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा 
सह संपादक ‘स्रवंति’ 
असिस्टेंट प्रोफेसर 
उच्च शिक्षा और शोध संस्थान 
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा 
खैरताबाद, हैदराबाद – 500004   

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26 Feb 2019
स्पंदन संस्था भोपाल के सम्मानों की घोषणा

स्पंदन संस्था भोपाल के सम्मानों की घोषणा

श्री उदयन बाजपेई, श्री पंकज सुबीर, श्री आलोक चटर्जी, श्री महेश दर्पण तथा श्री प्रेम जनमेजय को स्पंदन सम्मान प्रदान किया जाएगा, युवा स्पंदन पुरस्कार श्री थवई थियाम को।

ललित कलाओं के लिए समर्पित स्पंदन संस्था भोपाल की ओर से स्थापित सामानों की घोषणा कर दी गई है। वर्ष 2018 का 'स्पंदन कथा शिखर सम्मान' हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार श्री असगर वजाहत को प्रदान किया जाएगा। 'स्पंदन कृति सम्मान' कविता संग्रह 'केवल कुछ वाक्य' के लिए कवि श्री उदयन वाजपेई को, 'स्पंदन कृति सम्मान' उपन्यास 'अकाल में उत्सव' के लिए श्री पंकज सुबीर को, 'स्पंदन आलोचना सम्मान' श्री महेश दर्पण को, 'स्पंदन ललित कला सम्मान' रंग कर्म के लिए श्री आलोक चटर्जी को, 'स्पंदन साहित्यिक पत्रिका सम्मान' व्यंग्य यात्रा के लिए श्री प्रेम जनमेजय को तथा 'स्पंदन युवा पुरस्कार' थिवई थियाम को देने का निर्णय सर्वानुमति से किया गया है। 

स्पंदन सम्मान समारोह की संयोजक उर्मिला शिरीष ने बताया कि सम्मान समारोह दिनांक 29 तथा 30 मार्च 2019 को भोपाल में आयोजित किया जाएगा।

उर्मिला शिरीष 
संयोजक

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26 Feb 2019
ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा कथा-कविता सम्मान घोषित

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा कथा-कविता सम्मान घोषित

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अमेरिका ने अपने प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन ने अपने कथा-कविता सम्मान घोषित कर दिए हैं। ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन सम्मानों की चयन समिति के संयोजक पंकज सुबीर ने बताया कि "ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन लाइफ़ टाइम एचीवमेंट सम्मा" हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार तथा केंद्रीय हिन्दी संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयनका को, "ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान" उपन्यास विधा में हिन्दी की चर्चित लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ को उपन्यास 'मल्लिका' हेतु तथा कहानी विधा में हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार और समावर्तन के संपादक मुकेश वर्मा को कहानी संग्रह 'सत्कथा कही नहीं जाती' हेतु प्रदान किए जाएँगे। शिवना प्रकाशन के सम्मानों की चयन समिति के संयोजक श्री नीरज गोस्वामी ने बताया कि 'शिवना कथा सम्मान' हिन्दी की चर्चित लेखिका गीताश्री को उपन्यास 'हसीनाबाद' के लिए, 'शिवना कविता सम्मान' महत्त्वपूर्ण कवि वसंत सकरगाए को कविता संग्रह 'पखेरू जानते हैं' तथा 'शिवना कृति सम्मान' शिवना प्रकाशन से प्रकाशित उपन्यास 'पार्थ तुम्हें जीना होगा' के लिए कथाकार, कवयित्री ज्योति जैन को प्रदान किए जाएँगे। शिवना प्रकाशन तथा ढींगरा फ़ैमिली द्वारा संयुक्त रूप से 17 मार्च 2019 रविवार को भोपाल के राज्य संग्रहालय के सभागार में आयोजित 'ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन- शिवना साहित्य समागम' में यह सम्मान प्रदान प्रदान किये जाएँगे। चार सत्रों में आयोजित होने वाले इस समागम में शिवना प्रकाशन की पुस्तकों का विमोचन, रचना पाठ, सम्मान समारोह तथा विमर्श का समावेश रहेगा, जिसमें हिन्दी के महत्त्वपूर्ण साहित्यकार भाग लेंगे।

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अमेरिका का यह तीसरा सम्मान समारोह है। हिन्दी की वरिष्ठ कथाकार, कवयित्री, संपादक डॉ. सुधा ओम ढींगरा तथा उनके पति डॉ. ओम ढींगरा द्वारा स्थापित इस फ़ाउण्डेशन के यह सम्मान इससे पूर्व श्रीमती उषा प्रियंवदा, श्रीमती चित्रा मुद्गल, श्री महेश कटारे, डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी, श्रीमती सुदर्शन प्रियदर्शिनी, तथा श्री हरिशंकर आदेश को प्रदान किया जा चुका है। सभी सम्मानों के तहत सम्मान राशि, शॉल, श्रीफल तथा सम्मान पट्टिका प्रदान की जाएगी।
शहरयार अमजद ख़ान
शिवना प्रकाशन

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22 Feb 2019
हिम की चादर पे खेले बसंत राज

हिम की चादर पे खेले बसंत राज

फरवरी 09, 2019 - कैनेडा की जानी-मानी और बहुआयामी संस्था हिंदी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी ०९ फ़रवरी २०१९ को स्प्रिंगडेल लायब्ररी, ब्रैम्पटन में दोपहर १.३० बजे प्रारंभ हुई। “हिम की चादर पे खेले बसंत राज” को चरितार्थ करता बर्फ़ीला मौसम था फिर भी कवियों और श्रोताओं ने बड़ी संख्या में आकर हिंदी के प्रति प्रेम का परिचय दिया। बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर सभी ने एक दूसरे को बसंत ऋतु के आगमन पर बधाई दी। हिंदी राइटर्स गिल्ड द्वारा आयोजित समोसे, बर्फ़ी, गर्म चाय और श्रीमती सविता अग्रवाल द्वारा परोसे गए, बसन्ती मीठे चावलों का सभी ने भरपूर आनंद उठाया।

कार्यक्रम की संचालिका श्रीमती आशा बर्मन ने अपना कार्यभार संभालते हुए सभी का स्वागत किया और हिंदी साहित्य जगत के चारों काल वीर गाथा काल, भक्ति काल, रीति काल और आधुनिक काल के बारे में संक्षिप्त परिचय देते हुए, भक्ति काल में सूर, तुलसी, रहीम और कबीर के बारे में चर्चा करते हुए हिंदी के नौ रसों में श्रृंगार रस को सभी रसों का राजा बताया क्योंकि यह माह प्रेम के रूप में भी मनाया जाता है इसलिए इस गोष्ठी का विषय भी प्रेम ही था। प्रेम का स्वरुप इतना व्यापक है कि उसे किसी सीमा में बांधा नहीं जा सकता है इसीलिये सभी ने अपने-अपने ढंग से अपने प्रेम की अनुभूतियों को प्रस्तुत किया। सर्वप्रथम श्रीमती सविता अग्रवाल ने बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है और उसके महत्व के बारे में अपनी बात रखी तथा हिंदी के एक लेखक श्री उदय भानु हंस की कविता “मैं तुमसे प्रीत लगा बैठा” की प्रस्तुति की। दूसरे कवि श्री नरेन्द्र ग्रोवर ने अपनी कविता “रेल यात्रा” प्रस्तुत की, इस कविता में ग्रोवर जी ने रेल यात्री के सुन्दर अनुभवों जैसे मूंगफली खाकर छिलके फेंकने का आनंद और एक मुसाफ़िर के बार बार छींक रोकने की बात को बड़े अनोखे ढंग से हास्य का पुट देकर यात्रा का किस्सा सुनाया। तत्पश्चात श्रीमती कृष्णा वर्मा ने अपनी कविता में “प्रेम की स्याही से नज़रें सीने पर पैगाम लिख जाती हैं, प्रेम में सोच रेशमी हो जाती है” जैसी पंक्तियों से प्रेम रस की अनुभूति को दर्शाया। दूसरी कविता “क्यूँ बाबा” में एक पुत्री के अपने बाबा से कई सवाल और लड़के लड़की के अन्तर को मिटाने की गुहार को बड़े सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया। अगले कवि श्री अखिल भंडारी ने अपनी गज़ल “हुई मुद्दत कोई आया नहीं था” में ऐसे दोस्त की बात की, जो बुरे वक़्त में भी काम नहीं आया। श्रीमती आशा बर्मन ने डॉ. इंदु रायज़ादा को आमंत्रित करने से पूर्व ख़ूबसूरत अंदाज़ में फैज़ की कुछ पंक्तियां पढ़ीं। डॉ. इंदु रायज़ादा ने सर्व प्रथम गायत्री मंत्र की स्तुति की और इसके अर्थ को भी बताया। सभी ने मिलकर तीन बार इस मंत्र का उच्चारण किया। प्रेम की चर्चा करते हुए प्रेम में वात्सल्य रस के अपने कुछ अनुभवों की चर्चा की, प्रेम में संबंधों का टूटना फिर जुड़ जाना, बंधन टूटने पर मानव का बिखर जाना, पर फिर भी जीवन को जीते रहना इत्यादि अनेक उदाहरण देकर अपने विचार रखे। इंदु जी ने श्री हरिवंशराय बच्चन की लिखी कुछ पंक्तियों को भी उद्दृत किया। अगले कवि श्री बाल शर्मा ने “मेरा गीत” नामक अपनी रचना की प्रस्तुति की जिसमें दुनिया की भीड़ में ’मन का मीत मिला दो’ और बादलों से बरस जाने जैसी इच्छाओं को प्रस्तुत किया गया था। अपनी दूसरी कविता में ‘एक प्रेमी तस्वीरों को ना देख कर भी उसमें अपने प्रिय को देख लेता है’ कहकर प्रेम के असीम विश्वास का वर्णन बख़ूबी किया। एक और कविता “हम सो रहे थे” की भी प्रस्तुति की। श्री इकबाल बरार, जो टोरंटो के जाने माने गायक हैं, ने हस्तीमल हस्ती (गज़लकार) की एक ग़ज़ल “वक़्त तो लगता है” को गाकर कर्ण आनंद से विभोर किया। उन्होंने बॉलीवुड की एक फिल्म का मशहूर गाना “तेरे बिन सूने नयन हमारे... को बहुत ख़ूबसूरती के साथ पेश किया। तत्पश्चात श्री सतीश सेठी ने अपनी रचना “मैं तेरी माँ हूँ” प्रस्तुत की, जिसमें माँ को सर्वोच्च मानते हुए मातृप्रेम को अनोखा और अलग माना है जिसका दुनिया में कोई सानी नहीं है। माँ के पास ना होते हुए भी माँ को सदैव अपने चारों ओर महसूस करते हैं। अगले लेखक और कवि श्री विजय विक्रांत को, जो हिंदी राइटर्स गिल्ड के संस्थापक निदेशक भी हैं, को मंच पर आमंत्रित किया गया। विक्रांत जी ने अमीर खुसरों और बसंत से जुड़ी एक घटना को कहानी के रूप में प्रस्तुत किया, उन्होंने बताया कि खुसरों के समय में हिन्दू मुस्लिम दोनों ही आपस के बैर भाव को त्याग कर बसंत पंचमी का त्यौहार मनाते थे और दरगाहों पर बसंत पंचमी के दिन फूल चढ़ाए जाते थे। अमीर खुसरो की दो रचनाओं जैसे “आज बसंत मना ले सुहागिन” और “सघन वन फूल रही सरसों” का भी वर्णन किया | हिंदी राइटर्स गिल्ड की गोष्ठी में पहली बार पधारे श्री विनोद महेन्द्रू ने श्री हरिवंशराय बच्चन की एक कविता “मकान चाहे कच्चे थे” की प्रस्तुति की जिसमें आधुनिक वस्तुओं के आ जाने से रिश्तों में दूरियां बढ़ गयीं हैं जैसे कई उदाहरण निहित हैं।

अंत में गोष्ठी की संचालिका श्रीमती आशा बर्मन को श्रीमती सविता अग्रवाल ने कविता पाठ के लिए मंच पर आमंत्रित किया। आशा जी ने “प्यार का प्रतिदान” नामक रचना को गाकर प्रस्तुत किया, दूसरी रचना  प्रसिद्ध कवि श्री सोम ठाकुर की, “ये प्याला प्रेम का प्याला है” को अपने मधुर कंठ से गाकर कविता में चार चाँद लगा दिए। एक नए सज्जन श्री राम सिंह इस गोष्ठी का हिस्सा बने, उन्हें भी मंच पर आमंत्रित किया किया गया। पंजाबी भाषी होते हुए भी उनका शुद्ध हिंदी उच्चारण सुनकर ह्रदय गद-गद  हो गया। उन्होंने बसंत पंचमी और रंगों पर अपने विचार रखे जिसमें भाषा के माध्यम से सभी रंगों को अपने अन्दर समेटा जा सकता है। सृजन की जिज्ञासा दुनिया के हर कोने में रहने वाले व्यक्ति में होती है, भाषा कोई भी छोटी या बड़ी नहीं होती | भाषा तो अपनी बात दूसरे तक पहुंचाने का एक माध्यम है कहते हुए अपनी बात समाप्त की। अंत में संचालिका आशा बर्मन ने सभी का धन्यवाद किया। श्री संजीव अग्रवाल ने अपने कैमरे से सबके चित्र लिए और अंत में एक सामूहिक चित्र भी लिया। ज़ी टी वी से पधारे श्री अरहान निज्जर ने कार्यक्रम के कुछ अंश वीडिओ कैमरे में उतार कर लेखकों का मनोबल बढ़ाया। इस प्रकार गोष्ठी का सफ़लतापूर्वक समापन हुआ।

--सविता अग्रवाल 'सवि'

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