26 Feb 2019
स्पंदन संस्था भोपाल के सम्मानों की घोषणा

स्पंदन संस्था भोपाल के सम्मानों की घोषणा

श्री उदयन बाजपेई, श्री पंकज सुबीर, श्री आलोक चटर्जी, श्री महेश दर्पण तथा श्री प्रेम जनमेजय को स्पंदन सम्मान प्रदान किया जाएगा, युवा स्पंदन पुरस्कार श्री थवई थियाम को।

ललित कलाओं के लिए समर्पित स्पंदन संस्था भोपाल की ओर से स्थापित सामानों की घोषणा कर दी गई है। वर्ष 2018 का 'स्पंदन कथा शिखर सम्मान' हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार श्री असगर वजाहत को प्रदान किया जाएगा। 'स्पंदन कृति सम्मान' कविता संग्रह 'केवल कुछ वाक्य' के लिए कवि श्री उदयन वाजपेई को, 'स्पंदन कृति सम्मान' उपन्यास 'अकाल में उत्सव' के लिए श्री पंकज सुबीर को, 'स्पंदन आलोचना सम्मान' श्री महेश दर्पण को, 'स्पंदन ललित कला सम्मान' रंग कर्म के लिए श्री आलोक चटर्जी को, 'स्पंदन साहित्यिक पत्रिका सम्मान' व्यंग्य यात्रा के लिए श्री प्रेम जनमेजय को तथा 'स्पंदन युवा पुरस्कार' थिवई थियाम को देने का निर्णय सर्वानुमति से किया गया है। 

स्पंदन सम्मान समारोह की संयोजक उर्मिला शिरीष ने बताया कि सम्मान समारोह दिनांक 29 तथा 30 मार्च 2019 को भोपाल में आयोजित किया जाएगा।

उर्मिला शिरीष 
संयोजक

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26 Feb 2019
ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा कथा-कविता सम्मान घोषित

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा कथा-कविता सम्मान घोषित

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अमेरिका ने अपने प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन ने अपने कथा-कविता सम्मान घोषित कर दिए हैं। ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन सम्मानों की चयन समिति के संयोजक पंकज सुबीर ने बताया कि "ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन लाइफ़ टाइम एचीवमेंट सम्मा" हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार तथा केंद्रीय हिन्दी संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयनका को, "ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान" उपन्यास विधा में हिन्दी की चर्चित लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ को उपन्यास 'मल्लिका' हेतु तथा कहानी विधा में हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार और समावर्तन के संपादक मुकेश वर्मा को कहानी संग्रह 'सत्कथा कही नहीं जाती' हेतु प्रदान किए जाएँगे। शिवना प्रकाशन के सम्मानों की चयन समिति के संयोजक श्री नीरज गोस्वामी ने बताया कि 'शिवना कथा सम्मान' हिन्दी की चर्चित लेखिका गीताश्री को उपन्यास 'हसीनाबाद' के लिए, 'शिवना कविता सम्मान' महत्त्वपूर्ण कवि वसंत सकरगाए को कविता संग्रह 'पखेरू जानते हैं' तथा 'शिवना कृति सम्मान' शिवना प्रकाशन से प्रकाशित उपन्यास 'पार्थ तुम्हें जीना होगा' के लिए कथाकार, कवयित्री ज्योति जैन को प्रदान किए जाएँगे। शिवना प्रकाशन तथा ढींगरा फ़ैमिली द्वारा संयुक्त रूप से 17 मार्च 2019 रविवार को भोपाल के राज्य संग्रहालय के सभागार में आयोजित 'ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन- शिवना साहित्य समागम' में यह सम्मान प्रदान प्रदान किये जाएँगे। चार सत्रों में आयोजित होने वाले इस समागम में शिवना प्रकाशन की पुस्तकों का विमोचन, रचना पाठ, सम्मान समारोह तथा विमर्श का समावेश रहेगा, जिसमें हिन्दी के महत्त्वपूर्ण साहित्यकार भाग लेंगे।

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अमेरिका का यह तीसरा सम्मान समारोह है। हिन्दी की वरिष्ठ कथाकार, कवयित्री, संपादक डॉ. सुधा ओम ढींगरा तथा उनके पति डॉ. ओम ढींगरा द्वारा स्थापित इस फ़ाउण्डेशन के यह सम्मान इससे पूर्व श्रीमती उषा प्रियंवदा, श्रीमती चित्रा मुद्गल, श्री महेश कटारे, डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी, श्रीमती सुदर्शन प्रियदर्शिनी, तथा श्री हरिशंकर आदेश को प्रदान किया जा चुका है। सभी सम्मानों के तहत सम्मान राशि, शॉल, श्रीफल तथा सम्मान पट्टिका प्रदान की जाएगी।
शहरयार अमजद ख़ान
शिवना प्रकाशन

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22 Feb 2019
हिम की चादर पे खेले बसंत राज

हिम की चादर पे खेले बसंत राज

फरवरी 09, 2019 - कैनेडा की जानी-मानी और बहुआयामी संस्था हिंदी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी ०९ फ़रवरी २०१९ को स्प्रिंगडेल लायब्ररी, ब्रैम्पटन में दोपहर १.३० बजे प्रारंभ हुई। “हिम की चादर पे खेले बसंत राज” को चरितार्थ करता बर्फ़ीला मौसम था फिर भी कवियों और श्रोताओं ने बड़ी संख्या में आकर हिंदी के प्रति प्रेम का परिचय दिया। बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर सभी ने एक दूसरे को बसंत ऋतु के आगमन पर बधाई दी। हिंदी राइटर्स गिल्ड द्वारा आयोजित समोसे, बर्फ़ी, गर्म चाय और श्रीमती सविता अग्रवाल द्वारा परोसे गए, बसन्ती मीठे चावलों का सभी ने भरपूर आनंद उठाया।

कार्यक्रम की संचालिका श्रीमती आशा बर्मन ने अपना कार्यभार संभालते हुए सभी का स्वागत किया और हिंदी साहित्य जगत के चारों काल वीर गाथा काल, भक्ति काल, रीति काल और आधुनिक काल के बारे में संक्षिप्त परिचय देते हुए, भक्ति काल में सूर, तुलसी, रहीम और कबीर के बारे में चर्चा करते हुए हिंदी के नौ रसों में श्रृंगार रस को सभी रसों का राजा बताया क्योंकि यह माह प्रेम के रूप में भी मनाया जाता है इसलिए इस गोष्ठी का विषय भी प्रेम ही था। प्रेम का स्वरुप इतना व्यापक है कि उसे किसी सीमा में बांधा नहीं जा सकता है इसीलिये सभी ने अपने-अपने ढंग से अपने प्रेम की अनुभूतियों को प्रस्तुत किया। सर्वप्रथम श्रीमती सविता अग्रवाल ने बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है और उसके महत्व के बारे में अपनी बात रखी तथा हिंदी के एक लेखक श्री उदय भानु हंस की कविता “मैं तुमसे प्रीत लगा बैठा” की प्रस्तुति की। दूसरे कवि श्री नरेन्द्र ग्रोवर ने अपनी कविता “रेल यात्रा” प्रस्तुत की, इस कविता में ग्रोवर जी ने रेल यात्री के सुन्दर अनुभवों जैसे मूंगफली खाकर छिलके फेंकने का आनंद और एक मुसाफ़िर के बार बार छींक रोकने की बात को बड़े अनोखे ढंग से हास्य का पुट देकर यात्रा का किस्सा सुनाया। तत्पश्चात श्रीमती कृष्णा वर्मा ने अपनी कविता में “प्रेम की स्याही से नज़रें सीने पर पैगाम लिख जाती हैं, प्रेम में सोच रेशमी हो जाती है” जैसी पंक्तियों से प्रेम रस की अनुभूति को दर्शाया। दूसरी कविता “क्यूँ बाबा” में एक पुत्री के अपने बाबा से कई सवाल और लड़के लड़की के अन्तर को मिटाने की गुहार को बड़े सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया। अगले कवि श्री अखिल भंडारी ने अपनी गज़ल “हुई मुद्दत कोई आया नहीं था” में ऐसे दोस्त की बात की, जो बुरे वक़्त में भी काम नहीं आया। श्रीमती आशा बर्मन ने डॉ. इंदु रायज़ादा को आमंत्रित करने से पूर्व ख़ूबसूरत अंदाज़ में फैज़ की कुछ पंक्तियां पढ़ीं। डॉ. इंदु रायज़ादा ने सर्व प्रथम गायत्री मंत्र की स्तुति की और इसके अर्थ को भी बताया। सभी ने मिलकर तीन बार इस मंत्र का उच्चारण किया। प्रेम की चर्चा करते हुए प्रेम में वात्सल्य रस के अपने कुछ अनुभवों की चर्चा की, प्रेम में संबंधों का टूटना फिर जुड़ जाना, बंधन टूटने पर मानव का बिखर जाना, पर फिर भी जीवन को जीते रहना इत्यादि अनेक उदाहरण देकर अपने विचार रखे। इंदु जी ने श्री हरिवंशराय बच्चन की लिखी कुछ पंक्तियों को भी उद्दृत किया। अगले कवि श्री बाल शर्मा ने “मेरा गीत” नामक अपनी रचना की प्रस्तुति की जिसमें दुनिया की भीड़ में ’मन का मीत मिला दो’ और बादलों से बरस जाने जैसी इच्छाओं को प्रस्तुत किया गया था। अपनी दूसरी कविता में ‘एक प्रेमी तस्वीरों को ना देख कर भी उसमें अपने प्रिय को देख लेता है’ कहकर प्रेम के असीम विश्वास का वर्णन बख़ूबी किया। एक और कविता “हम सो रहे थे” की भी प्रस्तुति की। श्री इकबाल बरार, जो टोरंटो के जाने माने गायक हैं, ने हस्तीमल हस्ती (गज़लकार) की एक ग़ज़ल “वक़्त तो लगता है” को गाकर कर्ण आनंद से विभोर किया। उन्होंने बॉलीवुड की एक फिल्म का मशहूर गाना “तेरे बिन सूने नयन हमारे... को बहुत ख़ूबसूरती के साथ पेश किया। तत्पश्चात श्री सतीश सेठी ने अपनी रचना “मैं तेरी माँ हूँ” प्रस्तुत की, जिसमें माँ को सर्वोच्च मानते हुए मातृप्रेम को अनोखा और अलग माना है जिसका दुनिया में कोई सानी नहीं है। माँ के पास ना होते हुए भी माँ को सदैव अपने चारों ओर महसूस करते हैं। अगले लेखक और कवि श्री विजय विक्रांत को, जो हिंदी राइटर्स गिल्ड के संस्थापक निदेशक भी हैं, को मंच पर आमंत्रित किया गया। विक्रांत जी ने अमीर खुसरों और बसंत से जुड़ी एक घटना को कहानी के रूप में प्रस्तुत किया, उन्होंने बताया कि खुसरों के समय में हिन्दू मुस्लिम दोनों ही आपस के बैर भाव को त्याग कर बसंत पंचमी का त्यौहार मनाते थे और दरगाहों पर बसंत पंचमी के दिन फूल चढ़ाए जाते थे। अमीर खुसरो की दो रचनाओं जैसे “आज बसंत मना ले सुहागिन” और “सघन वन फूल रही सरसों” का भी वर्णन किया | हिंदी राइटर्स गिल्ड की गोष्ठी में पहली बार पधारे श्री विनोद महेन्द्रू ने श्री हरिवंशराय बच्चन की एक कविता “मकान चाहे कच्चे थे” की प्रस्तुति की जिसमें आधुनिक वस्तुओं के आ जाने से रिश्तों में दूरियां बढ़ गयीं हैं जैसे कई उदाहरण निहित हैं।

अंत में गोष्ठी की संचालिका श्रीमती आशा बर्मन को श्रीमती सविता अग्रवाल ने कविता पाठ के लिए मंच पर आमंत्रित किया। आशा जी ने “प्यार का प्रतिदान” नामक रचना को गाकर प्रस्तुत किया, दूसरी रचना  प्रसिद्ध कवि श्री सोम ठाकुर की, “ये प्याला प्रेम का प्याला है” को अपने मधुर कंठ से गाकर कविता में चार चाँद लगा दिए। एक नए सज्जन श्री राम सिंह इस गोष्ठी का हिस्सा बने, उन्हें भी मंच पर आमंत्रित किया किया गया। पंजाबी भाषी होते हुए भी उनका शुद्ध हिंदी उच्चारण सुनकर ह्रदय गद-गद  हो गया। उन्होंने बसंत पंचमी और रंगों पर अपने विचार रखे जिसमें भाषा के माध्यम से सभी रंगों को अपने अन्दर समेटा जा सकता है। सृजन की जिज्ञासा दुनिया के हर कोने में रहने वाले व्यक्ति में होती है, भाषा कोई भी छोटी या बड़ी नहीं होती | भाषा तो अपनी बात दूसरे तक पहुंचाने का एक माध्यम है कहते हुए अपनी बात समाप्त की। अंत में संचालिका आशा बर्मन ने सभी का धन्यवाद किया। श्री संजीव अग्रवाल ने अपने कैमरे से सबके चित्र लिए और अंत में एक सामूहिक चित्र भी लिया। ज़ी टी वी से पधारे श्री अरहान निज्जर ने कार्यक्रम के कुछ अंश वीडिओ कैमरे में उतार कर लेखकों का मनोबल बढ़ाया। इस प्रकार गोष्ठी का सफ़लतापूर्वक समापन हुआ।

--सविता अग्रवाल 'सवि'

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